रविवार, 15 मार्च 2026

लग्नेश का महत्व — क्या सबल लग्नेश अनेक दोषों को संतुलित कर सकता है?

 लग्न और लग्नेश ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसे हम निम्न प्रकार समझते हैं:-------

लग्न (Ascendant/Lascum)

लग्न वह राशि होती है जो जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही होती है। यह आपकी बाहरी व्यक्तित्व, स्वभाव और जीवन की दिशा को दर्शाती है। इसे प्रथम भाव भी कहते हैं।

लग्नेश (Lord of Ascendant)

लग्नेश वह ग्रह होता है जो लग्न में स्थित राशि का स्वामी होता है। यह आपकी ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन शक्ति को प्रभावित करता है।

उदाहरण के लिए, अगर आपका लग्न मेष है, तो मंगल आपका लग्नेश होगा।

लग्न और लग्नेश का महत्व हम निम्न विन्दुओं के जरिये समझने का प्रयास करते हैं:------

(1) लग्न और लग्नेश का ज्योतिषीय आधार---जीवन की मूल धुरी

लग्न और लग्नेश जीवन की मूल धुरी है, जो आपके जीवन की दिशा और गति को निर्धारित करते हैं।

लग्न का महत्व:

1. जीवन की दिशा: लग्न आपके जीवन की दिशा को निर्धारित करता है, जो आपके जन्म के समय के आधार पर तय होता है।

2. व्यक्तित्व: लग्न आपके व्यक्तित्व को दर्शाता है, जिसमें आपकी सोच, भावनाएं, और व्यवहार शामिल हैं।

3. जीवन के उद्देश्य: लग्न आपके जीवन के उद्देश्य को निर्धारित करता है, जो आपके जन्म के समय के आधार पर तय होता है।

लग्नेश का महत्व:

1. जीवन की शक्ति: लग्नेश आपके जीवन की शक्ति को दर्शाता है, जो आपके आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को बढ़ाता है।

2. सफलता और असफलता: लग्नेश आपके जीवन में सफलता और असफलता का कारण बनता है।

3. जीवन के विभिन्न पहलू: लग्नेश आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे कि स्वास्थ्य, धन, संबंध, करियर आदि को प्रभावित करता है।

लग्न और लग्नेश का संबंध:

1. संतुलन: लग्न और लग्नेश का संतुलन आपके जीवन में संतुलन और स्थिरता को बढ़ाता है।

2. शक्ति और दिशा: लग्नेश आपके जीवन को शक्ति और दिशा प्रदान करता है, जबकि लग्न आपके जीवन की दिशा को निर्धारित करता है।

3. जीवन की सफलता: लग्न और लग्नेश का संतुलन आपके जीवन में सफलता को बढ़ाता है।

(2) सबल लग्नेश का प्रभाव---स्वास्थय,निर्णय शक्ति और जीवन दिशा

सबल लग्नेश हमारे जीवन के कई पहलुओं पर निम्न  प्रकार सकारात्मक प्रभाव डालता है:---

स्वास्थ्य: एक मजबूत लग्नेश आपको अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है, जिससे आप ऊर्जावान और सक्रिय रहते हैं। यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, जिससे आप बीमारियों से लड़ने में सक्षम होते हैं।

निर्णय शक्ति: लग्नेश के बलवान होने से आपकी निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। आप आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहते हैं।

जीवन दिशा: एक मजबूत लग्नेश आपके जीवन को एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है। आप अपने जीवन के उद्देश्य को समझते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।

इसके अलावा, लग्नेश के बलवान होने से आपको प्रसिद्धि, सम्मान और समृद्धि भी प्राप्त होती है। यह आपके व्यक्तित्व को आकर्षक बनाता है और आपको नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।

(3)यदि कुंडली में अनेक दोष होंतो क्या सबल लग्नेश उन्हें संतुलित कर सकता है?

 सबल लग्नेश कुंडली के कई दोषों को संतुलित कर सकता है, लेकिन यह सब कुंडली में स्थित ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।

कैसे संतुलित करता है?

1. नकारात्मक प्रभावों को कम करता है: एक मजबूत लग्नेश कुंडली में मौजूद नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को कम कर सकता है।

2. सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है: लग्नेश के बलवान होने से आपकी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे आप जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम होते हैं।

3. कुंडली के अन्य ग्रहों को प्रभावित करता है: एक मजबूत लग्नेश कुंडली के अन्य ग्रहों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे उनका नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है।

क्या सबल लग्नेश सभी दोषों को संतुलित कर सकता है?

नहीं, सबल लग्नेश सभी दोषों को संतुलित नहीं कर सकता है। कुछ दोष इतने मजबूत होते हैं कि उन्हें संतुलित करने के लिए विशेष उपायों की आवश्यकता होती है, जैसे कि पूजा, दान।

कुंडली के दोष जो सबल लग्नेश संतुलित कर सकता है:

1. ग्रहों की नकारात्मक स्थिति: सबल लग्नेश ग्रहों की नकारात्मक स्थिति के प्रभाव को कम कर सकता है।

2. दशा की नकारात्मकता: लग्नेश के बलवान होने से दशा की नकारात्मकता कम हो सकती है।

3. कुंडली में अशुभ योग: सबल लग्नेश कुंडली में अशुभ योगों के प्रभाव को कम कर सकता है।

क्या करें?

यदि आप अपने लग्नेश को मजबूत करना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

1. लग्नेश के लिए पूजा करें: अपने लग्नेश के अनुसार पूजा करें, जैसे कि सूर्य के लिए सूर्य पूजा, चंद्र के लिए चंद्र पूजा, आदि।

2. रत्न पहनें: अपने लग्नेश के अनुसार रत्न पहनें, जैसे कि मणि, मूंगा, आदि।

3. दान करें: अपने लग्नेश के अनुसार दान करें, जैसे कि अनाज, कपड़े, आदि।

(4.)निर्बल लग्नेश होने पर शुभ योगों का प्रभाव कितना घटता है?

 निर्बल लग्नेश कुंडली के शुभ प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकता है। जो कि निम्न है:--

शुभ प्रभावों में कमी:

1. स्वास्थ्य पर प्रभाव: निर्बल लग्नेश आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे आप बीमारियों से लड़ने में असक्षम हो सकते हैं।

2. निर्णय शक्ति में कमी: लग्नेश के निर्बल होने से आपकी निर्णय लेने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे आप सही निर्णय लेने में असमर्थ हो सकते हैं।

3. जीवन में असफलता: निर्बल लग्नेश आपके जीवन में असफलता का कारण बन सकता है, जिससे आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

4. नकारात्मक सोच: लग्नेश के निर्बल होने से आपकी सोच नकारात्मक हो सकती है, जिससे आप जीवन को नकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं।

5. समस्याओं का सामना: निर्बल लग्नेश आपको समस्याओं का सामना करने में असमर्थ बना सकता है, जिससे आप जीवन में आने वाली चुनौतियों से लड़ नहीं पाते हैं।

कुंडली के अन्य ग्रहों पर प्रभाव:

निर्बल लग्नेश कुंडली के अन्य ग्रहों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे उनके शुभ प्रभाव कम हो सकते हैं।

क्या करें?

यदि आपका लग्नेश निर्बल है, तो आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:

1. लग्नेश के लिए पूजा करें: अपने लग्नेश के अनुसार पूजा करें, जैसे कि सूर्य के लिए सूर्य पूजा, चंद्र के लिए चंद्र पूजा, आदि।

2. रत्न पहनें: अपने लग्नेश के अनुसार रत्न पहनें, जैसे कि मणि, मूंगा, आदि।

3. दान करें: अपने लग्नेश के अनुसार दान करे।

(5)नवांश और दशा मे लग्नेश की भूमिका

नवांश और दशा में लग्नेश की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे निम्न प्रकार से समझा जा सकता है:---

नवांश में लग्नेश:

1. लग्नेश की स्थिति: नवांश में लग्नेश की स्थिति आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती है।

2. शुभ या अशुभ प्रभाव: नवांश में लग्नेश की स्थिति के आधार पर आपको शुभ या अशुभ प्रभाव मिलते हैं।

3. जीवन के विभिन्न पहलू: नवांश में लग्नेश की स्थिति आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे कि स्वास्थ्य, धन, संबंध, करियर आदि को प्रभावित करती है।

दशा में लग्नेश:

1. दशा का प्रभाव: दशा में लग्नेश का प्रभाव आपके जीवन पर पड़ता है, जिससे आपके जीवन में परिवर्तन आते हैं।

2. शुभ या अशुभ प्रभाव: दशा में लग्नेश के प्रभाव के आधार पर आपको शुभ या अशुभ फल मिलते हैं।

3. जीवन के विभिन्न पहलू: दशा में लग्नेश का प्रभाव आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे कि स्वास्थ्य, धन, संबंध, करियर आदि पर पड़ता है।

लग्नेश की भूमिका:

1. जीवन की दिशा: लग्नेश आपके जीवन की दिशा को निर्धारित करता है।

2. सफलता और असफलता: लग्नेश आपके जीवन में सफलता और असफलता का कारण बनता है।

3. जीवन के विभिन्न पहलू: लग्नेश आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे कि स्वास्थ्य, धन, संबंध, करियर आदि को प्रभावित करता है।

क्या करें?

यदि हम अपने लग्नेश की भूमिका को समझना चाहते हैं, तो हम निम्नलिखित तरीके से समझ सकते हैं:---

1. कुंडली विश्लेषण: अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएं, जिससे आपको अपने लग्नेश की स्थिति के बारे में पता चल सके।

2. लग्नेश के लिए पूजा: अपने लग्नेश के अनुसार पूजा करें, जैसे कि सूर्य के लिए सूर्य पूजा, चंद्र के लिए चंद्र पूजा, आदि।

3. रत्न पहनें: अपने लग्नेश के अनुसार रत्न पहनें, जैसे कि मणि, मूंगा, आदि।

नीच ग्रह: क्या वास्तव में सदैव दुर्बल और अशुभ होते हैं?

 ज्योतिष शास्त्र में “नीच” शब्द सुनते ही अक्सर नकारात्मक छवि उभरती है – कमजोर, पीड़ादायक, असफलता वाला। लेकिन क्या यह धारणा पूरी तरह सही है? पाराशर, फलदीपिका और उत्तर कालामृत जैसे शास्त्रों को ध्यान से पढ़ें तो पता चलता है कि नीचत्व कोई “अभिशाप” नहीं, बल्कि ग्रह के स्वभाव का असंतुलन या विशेष परिस्थिति है।

१. नीचत्व का शास्त्रीय अर्थ

शास्त्रों में नीच का अर्थ है – “स्वक्षेत्र से विपरीत राशि में स्थित होकर ग्रह अपना सामान्य स्वभाव पूर्ण रूप से नहीं दिखा पाता”।

•  सूर्य नीच (तुला) → नेतृत्व क्षमता पर अंकुश, लेकिन अहंकार का संतुलन सिखाता है।

•  चंद्र नीच (वृश्चिक) → मन की अस्थिरता, लेकिन गहरी संवेदनशीलता देता है।

•  मंगल नीच (कर्क) → क्रोध पर नियंत्रण की सीख।

यह “दुर्बलता” नहीं, बल्कि स्वभाव का विशेष मोड़ है। ठीक उसी तरह जैसे सोना आग में तपने पर निखरता है, वैसे ही नीच ग्रह भी विशेष परिस्थिति में अपनी छिपी शक्ति दिखाता है।

२. नीच ग्रह का व्यवहारिक फल – सदैव कष्ट ही?

नहीं।

वास्तविक जीवन में देखें तो बहुत से सफल लोग नीच ग्रहों के धनी होते हैं, लेकिन वे “अच्छे स्थान” (केंद्र/त्रिकोण) में हों या अन्य बल प्राप्त हों। उदाहरण:

•  राहुल गांधी, अमिताभ बच्चन, साक्षी मलिक, विराट कोहली – इनकी इंटरनेट पर मजूद कुंडलियों में एक-दो नीच ग्रह हैं, परिणाम? संघर्ष के बाद अपार सफलता।
नीच ग्रह कष्ट अवश्य देता है, लेकिन वह कष्ट “शिक्षा” का रूप लेता है। वह व्यक्ति को विनम्र, मेहनती और अंतर्मुखी बनाता है। सदैव अशुभ नहीं – जब तक वह “मरण-मरण” (पूर्ण नीच) न हो और कोई बचाव न हो।

३. नीचभंग राजयोग – सिद्धांत और वास्तविकता

यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।

शास्त्रीय सिद्धांत (फलदीपिका, उत्तर कालामृत):

नीच ग्रह के नीचभंग के ४ मुख्य कारण –

1.  नीच राशि का स्वामी लग्न या चंद्र से केंद्र में हो।

2.  उस राशि का उच्च-स्वामी केंद्र में हो।

3.  नीच ग्रह स्वयं उच्च राशि के स्वामी के साथ हो।

4.  नीच ग्रह और उसके स्वामी दोनों केंद्र में हों।

जब ये शर्तें पूरी होती हैं तो “नीचभंग राजयोग” बनता है – राजा बनने वाला योग।

वास्तविकता: केवल शर्त पूरी होने से राजयोग नहीं बन जाता। दशा, गोचर, नवांश, दृष्टि और अन्य ग्रहों का सहयोग भी जरूरी है। बहुत बार “कागजी राजयोग” बन जाता है – नाम तो राजयोग, लेकिन फल साधारण। फिर भी सच्चाई यह है कि नीचभंग वाला ग्रह साधारण नीच ग्रह से कहीं अधिक शक्तिशाली साबित होता है।

४. नीच ग्रह पर शुभ दृष्टि या बल मिलने पर फल में परिवर्तन

यहाँ जादू होता है!

•  गुरु या शुक्र की दृष्टि नीच ग्रह पर → कष्ट बहुत कम, फल शुभ।

•  स्वक्षेत्री या उच्चांश नवांश में हो → “नीच” नाम मात्र का रह जाता है।

•  वर्गोत्तम या पुष्करांश में हो → नीचत्व लगभग समाप्त।

•  मित्र राशि के स्वामी की दृष्टि → ग्रह “अर्ध-नीच” बन जाता है।

उदाहरण: अगर शनि नीच (मेष) हो लेकिन गुरु की दृष्टि में और अपनी उच्च राशि के स्वामी (शुक्र) के केंद्र में हो, तो वह व्यक्ति मेहनत से अमीर बन सकता है।

५. दशा में नीच ग्रह के अनुभव – संघर्ष, सीख और परिपक्वता

जब नीच ग्रह की दशा/अंतर्दशा चलती है तो पहले १-२ वर्ष कष्ट, अपमान, स्वास्थ्य समस्या या आर्थिक तंगी आती है। लेकिन यही काल परिपक्वता का काल भी है।

•  व्यक्ति अपनी कमजोरियों को पहचानता है।

•  पुरानी गलतियों से सीखता है।

•  अंत में मजबूत, समझदार और सफल निकलता है।

जैसे शनि की नीच दशा में व्यक्ति “संतोष” सीखता है, राहु-केतु की नीच दशा में “वैराग्य” और “आध्यात्मिक उन्नति”। कई ज्योतिषी कहते हैं – “नीच ग्रह की दशा व्यक्ति को तोड़ती नहीं, ढालती है।”

अंतिम विचार

नीच ग्रह सदैव दुर्बल और अशुभ नहीं होते। वे चुनौती देते हैं, सीख देते हैं और विशेष परिस्थिति में राजसी फल भी दे सकते हैं।

विद्वान ज्योतिषी कुंडली देखकर यही बताता है – “यह नीच ग्रह आपको गिराने नहीं, उड़ाने आया है… बस सही समय और सही दृष्टि का इंतजार है।”


 शास्त्रीय आधार देने के लिए कुछ प्रसिद्ध ग्रंथों से संबंधित सूत्र/श्लोक प्रस्तुत कर रहा हूँ।

१. बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (नीच ग्रह का सिद्धांत)

“नीचस्थोऽपि ग्रहः शुभदृष्ट्या बलवान् भवति ध्रुवम्।”

अर्थ:

यदि कोई ग्रह नीच राशि में हो, पर उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि या सहयोग हो, तो वह बल प्राप्त कर सकता है और शुभ फल भी दे सकता है।

यह सिद्धांत बताता है कि केवल नीचत्व देखकर निर्णय करना उचित नहीं है।

२. फलदीपिका – नीचभंग का संकेत

“नीचस्थोऽपि ग्रहः केन्द्रे स्वोच्चनाथसमन्वितः।

राजयोगं प्रयच्छेत् स्यात् नीचभंगः स उच्यते॥”

अर्थ:

यदि नीच ग्रह केंद्र में हो और उसका संबंध उस ग्रह से बने जो उसकी उच्च राशि का स्वामी है, तो वह नीचत्व भंग होकर राजयोग देने में सक्षम हो सकता है।

यही सिद्धांत नीचभंग राजयोग का मूल आधार है।

३. जातक पारिजात – नीच ग्रह का परिवर्तित फल

“नीचो ग्रहः शुभदृष्टः शुभयोगसमन्वितः।

फलानि शुभदान्येव ददाति नात्र संशयः॥”

अर्थ:

यदि नीच ग्रह पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो या वह शुभ योगों से संबंधित हो, तो वह भी शुभ फल दे सकता है।


४. फलदीपिका – ग्रह बल का महत्व

“स्वोच्चस्वक्षेत्रसंयुक्तो मित्रराशिगतः ग्रहः।

बलवान् शुभदः प्रोक्तो नीचोऽपि बलसंयुतः॥”

अर्थ:

यदि ग्रह किसी प्रकार से बल प्राप्त कर ले (स्वक्षेत्र, मित्र राशि, शुभ दृष्टि आदि से), तो वह नीच होने पर भी शुभ फल देने की क्षमता रखता है।


जय श्री श्याम 


शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

सबके दाता राम- मलूकदास जी की कथा

मलूकदास जी कर्मयोगी संत थे. स्वाध्याय, सत्संग व भ्रमण से उन्होंने जो व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया उसका मुकाबला किताबी ज्ञान नहीं कर सकता. औरंगजेब जैसा पशुवत मनुष्य भी उनके सत्संग का सम्मान करता था.

शुरू में संत मलूकदास जी नास्तिक थे. उनके गांव में एक साधु आए और आकर टिक गए. साधुजी लोगों को रामायण सुनाते थे. प्रतिदिन सुबह-शाम गांव वाले उनका दर्शन करते और उनसे राम कथा का आनंद लेते.

संयोग से एक दिन मलूकदास भी राम कथा में पहुंचे. उस समय साधु महाराजा ग्रामीणों को श्रीराम की महिमा बताते कह रहे थे- श्रीराम संसार के सबसे बड़े दाता है. वह भूखों को अन्न, नंगों को वस्त्र और आश्रयहीनों को आश्रय देते हैं.

मलूकदास ने भी साधु की यह बात सुनी पर उनके पल्ले नहीं पड़ी. उन्होंने अपना विरोध जताते तर्क किया- क्षमा करे महात्मन ! यदि मैं चुपचाप बैठकर राम का नाम लूं, कोई काम न करूं, तब भी क्या राम भोजन देंगे ?

साधु ने पूरे विश्वास के साथ कहा- अवश्य देंगे. उनकी दृढता से मलूकदास के मन में एक और प्रश्न उभरा तो पूछ बैठे- यदि मैं घनघोर जंगल में अकेला बैठ जाऊं, तब ? साधु ने दृढ़ता के साथ कहा- तब भी श्रीराम भोजन देंगे !

बात मलूकदास को लग गई. अब तो श्रीराम की दानशीलता की परीक्षा ही लेनी है. पहुंच गए जंगल में और एक घने पेड़ के ऊपर चढ़कर बैठ गए. चारों तरफ ऊंचे-ऊंचे पेड़ थे. कंटीली झाड़ियां थीं. दूर-दूर तक फैले जंगल में धीरे-धीरे खिसकता हुआ सूर्य पश्चिम की पहाड़ियों के पीछे छुप गया. 

चारों तरफ अंधेरा फैल गया, मगर न मलूकदास को भोजन मिला, न वह पेड़ से ही उतरे. सारी रात बैठे रहे.

अगले दिन दूसरे पहर घोर सन्नाटे में मलूकदास को घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई पड़ी. वह सतर्क होकर बैठ गए. थोड़ी देर में कुछ राजकीय अधिकारी उधर आते हुए दिखे. वे सब उसी पेड़ के नीचे घोड़ों से उतर पड़े. उन्होंने भोजन का मन बनाया. 

उसी समय जब एक अधिकारी थैले से भोजन का डिब्बा निकाल रहा था, शेर की जबर्दस्त दहाड़ सुनाई पड़ी. दहाड़ का सुनना था कि घोड़े बिदककर भाग गए.

अधिकारियों ने पहले तो स्तब्ध होकर एक-दूसरे को देखा, फिर भोजन छोड़ कर वे भी भाग गए. मलूकदास पेड़ से ये सब देख रहे थे. वह शेर की प्रतीक्षा करने लगे. मगर दहाड़ता हुआ शेर दूसरी तरफ चला गया.

मलूकदास को लगा, श्रीराम ने उसकी सुन ली है अन्यथा इस घनघोर जंगल में भोजन कैसे पहुंचता ? मगर मलूकदास तो मलूकदास ठहरे. उतरकर भला स्वयं भोजन क्यों करने लगे ! वह तो भगवान श्रीराम को परख रहे थे.

तीसरे पहर में डाकुओं का एक बड़ा दल उधर से गुजरा. पेड़ के नीचे चमकदार चांदी के बर्तनों में विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के रूप में पड़े भोजन को देख कर डाकू ठिठक गए.

डाकुओं के सरदार ने कहा- भगवान श्रीराम की लीला देखो. हम लोग भूखे हैं और भोजन की प्रार्थना कर रहे थे. इस निर्जन वन में सुंदर डिब्बों में भोजन भेज दिया. इसे खा लिया जाए तो आगे बढ़ें.

मलूकदास को हैरानी हुई कि डाकू भी श्रीराम पर इतनी आस्था रखते हैं कि वह भोजन भेजेंगे. वह यह सब सोच ही रहे थे कि उन्हें डाकुओं की बात में कुछ शंका सुनाई पड़ी.

डाकू स्वभावतः शकी होते हैं. एक साथी ने सावधान किया- सरदार, इस सुनसान जंगल में इतने सजे-धजे तरीके से सुंदर बर्तनों में भोजन का मिलना मुझे तो रहस्यमय लग रहा है. कहीं इसमें विष न हो.

यह सुनकर सरदार बोला- तब तो भोजन लाने वाला आस पास ही कहीं छिपा होगा. पहले उसे तलाशा जाए. सरदार के आदेश पर डाकू इधर-उधर तलाशने लगे. तभी एक डाकू की नजर मलूकदास पर पड़ी.

उसने सरदार को बताया. सरदार ने सिर उठाकर मलूकदास को देखा तो उसकी आंखें अंगारों की तरह लाल हो गईं. उसने घुड़ककर कहा- दुष्ट ! भोजन में विष मिलाकर तू ऊपर बैठा है ! चल उतर.

सरदार की कड़कती आवाज सुनकर मलूकदास डर गए मगर उतरे नहीं. वहीं से बोले- व्यर्थ दोष क्यों मंढ़ते हो ? भोजन में विष नहीं है. सरदार ने आदेश दिया- पहले पेड़ पर चढ़कर इसे भोजन कराओ. झूठ-सच का पता अभी चल जाता है.

आनन-फानन में तीन-चार डाकू भोजन का डिब्बा उठाए पेड़ पर चढ़ गए और छुरा दिखा कर मलूकदास को खाने के लिए विवश कर दिया. मलूकदास ने स्वादिष्ट भोजन कर लिया. फिर नीचे उतरकर डाकुओं को पूरा किस्सा सुनाया.

डाकुओं ने उन्हें छोड़ दिया. वह स्वयं भोजन से भाग रहे थे लेकिन प्रभु की माया ऐसी रही कि उन्हें बलात भोजन करा दिया. इस घटना के बाद मलूकदास ईश्वर पक्के भक्त हो गए.

गांव लौटकर मलूकदास ने सर्वप्रथम एक दोहा लिखा–

अजगर करे न चाकरी

पंछी करे न काम,

दास मलूका कह गए

सबके दाता राम॥

यह दोहा आज खूब सुनाया जाता है. आपके कर्म शुद्ध हैं. आपने कभी किसी का अहित करने की मंशा नहीं रखी तो ईश्वर आपके साथ सबसे ज्यादा प्रेमपूर्ण भाव रखते हैं, चाहे आप उन्हें भजें या न भजें.

आपके कर्म अच्छे हैं तो आप यदि मलूकदास जी की तरह प्रभु की परीक्षा लेने लगे तो भी वह इसका बुरा नहीं मानते. आपके सत्कर्मों का सम्मान करते स्वयं परीक्षा देने आ जाते हैं. छोटे-बड़े की भावना ईश्वर में नहीं होती. ये विकार तो मनुष्य को क्षीण करते हैं।

 श्री राम जय राम जय जय राम

शुक्रवार, 19 जुलाई 2024

सप्तम भाव- शादी चलेगी या नही?



कुंडली में शनि की स्थिति और विवाह उपाय 

शादी होना और शादी चलना यह दो अलग अलग बात है, कई बर ऐसी स्थिति पति-पत्नी के बीच बन जाती है कि शादी का रिश्ता टूटने की स्थिति में आ जाता है और बात तलाक आदि तक पहुँच जाती है।आज इसी विषय पर बात करते हैं यदि पति-पत्नी के बीच दूरियां हो गई है तो क्या शादी सही होकर चल पाएगी या नही और कैसे ठीक होगी?                                शादी में पति-पत्नी के बीच तब ही दूरियां बनती है मतलब अलग होने जैसी स्थितियां या तलाक आदि जैसी स्थितियां बनती है जब कुंडली का सातवाँ भाव(शादी भाव) और इसका स्वामी आदि पाप/अशुभ ग्रहों जैसे शनि राहु केतु मंगल/छठे आठवे बारहवे भाव स्वामियों या अस्त होकर बैठे अशुभ ग्रहों से दूषित होता है।तब इन पाप और अशुभ ग्रहों का 7वे भाव या 7वे भाव स्वामी या 7वे भाव-7वे भाव स्वामी दोनों पर इनका अशुभ प्रभाव पड़ता है लेकिन यदि सातवे भाव की स्थिति कही न कही शुभ और बलवान हुई, शुभ और अनुकूल ग्रहों का प्रभाव सातवे भाव/सातवे भाव स्वामी पर हुआ मतलब शादी चलने की स्थिति कुंडली मे है तो जो ग्रह वैवाहिक जीवन मे दिक्कत कर रहे है उनके उपाय करने के बाद शादी सही चलने लगती है और वैवाहिक जीवन सुखमय होने लगेगा।कैसे अब इस बात को उदाहरणो से समझते है कि शादी कैसी चल पाएगी, कैसे वैवाहिक जीवन मे दूरियां आदि होने पर वैवाहिक जीवन सुख से चल पाएगा?                                                          उदाहरण अनुसार मेष लग्न 1:- मेष लग्न में सातवें भाव का स्वामी शुक्र बनता है अब शुक्र के साथ राहु बैठा हो और कही न कही राहु या अन्य किसी पाप ग्रह जैसे शनि मंगल या केतु में से किसी का प्रभाव हो या तब शादी के बाद पति पत्नी में दूरियां जैसी स्थितिया ,वैवाहिक जीवन मे परेशानियां जैसी स्थितियां बनेगी, लेकिन अब विवाह स्वामी शुक्र यहां भाग्य स्वामी शुभ ग्रह बृहस्पति के साथ हो और गुरु की दृष्टि भी 7वे भाव पर पड़े तब शादी उपाय करने से ठीक हो जाएगी, परेशानियां जो भी विवाह सम्बन्धी होगी खत्म हो जाएगी दिक्कत करने वाले ग्रहों के शांति के उपाय करने से।                                                       

उदाहरण अनुसार कर्क लग्न 2:- कर्क लग्न में सातवें भाव(विवाह भाव)स्वामी शनि बनता है अब शादी यहाँ अस्त होकर रह केतु के साथ बैठा हो और सातवाँ भाव भी थोड़ा कमजोर हो तब वैवाहिक जीवन तलाक को ओर जाएगा, पति पत्नी में दूरियां बढ़ेगी, वैचारिक मतभेद आदि के कारण, लेकिन यही ऐसी स्थिति में सातवें भाव का स्वामी शनि जो राहु केतु के साथ है उस शनि के साथ गुरु शुक्र जैसी शुभ ग्रह भी बैठे हो तब शादी खण्डित नही होगी भले ही दूरियां हो जाये पति पत्नी में, अब यहां जो ग्रह दूरियां और दिक्कत कर रहे है उनकी शांति के उपाय करके शादी यहाँ पूरी तरह सही हो जाएगी क्योंकि सातवे भाव स्वामी शनि के साथ विवाह सुख के कारक दो शुभ ग्रह साथ बैठे है।                                                                    अब एक उदाहरण से समझते है कब शादी ठीक नही हो सकती या वैवाहिक जीवन मे पति पत्नी में दूरियां होने के बाद कब शादी नही सही हो सकती?                                         उदाहरण अनुसार कुंभ लग्न 3:- कुंभ लग्न में सातवें भाव का स्वामी सूर्य होता है ,अब सूर्य के साथ सूर्य का परम शत्रु राहु साथ बैठा हो और सातवें भाव मे कोई अस्त या छठे भाव का स्वामी यहाँ कुंभ लग्न में चन्द्रमा होता है यह सातवे भाव मे अस्त होकर या बहुत कमजोर होकर बैठे और सूर्य+सातवे भाव पर शुक्र+बुध या, गुरु प्रभाव ऐसी स्थिति में न हो तब यहां शादी नही चल पाएगी, तलाक या बिना तलाक अलग रहना पड़ेगा।                                                                          इस तरह यदि वैवाहिक जीवन मे दूरियां, दोनो पति पत्नी आपस मे अलग है, पति पत्नी आपस मे न बनने के कारण, वैचारिक मतभेद आदि के कारण तब यदि कुंडली में बचाब के योग है तब उपायों से ऐसी स्थिति में शादी बच जाएगी, वरना दोनों का तलाक होगा।

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

पार्थिव श्रीगणेश पूजन का महत्त्व


अलग अलग कामनाओ की पूर्ति के लिए अलग अलग द्रव्यों से बने हुए गणपति की स्थापना की जाती हैं।


(1) श्री गणेश-  मिट्टी के पार्थिव श्री गणेश बनाकर पूजन करने से सर्व कार्य सिद्धि होती हे!                         


(2) हेरम्ब-  गुड़ के गणेश जी बनाकर पूजन करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती हे। 

                                         

(3) वाक्पति-  भोजपत्र पर केसर से पर श्री गणेश प्रतिमा चित्र बनाकर।  पूजन करने से विद्या प्राप्ति होती हे।


 (4) उच्चिष्ठ गणेश-  लाख के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से स्त्री।  सुख और स्त्री को पतिसुख प्राप्त होता हे घर में ग्रह क्लेश निवारण होता हे। 


(5) कलहप्रिय-  नमक की डली या। नमक  के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से शत्रुओ में क्षोभ उतपन्न होता हे वह आपस में ही झगड़ने लगते हे। 


(6) गोबरगणेश-  गोबर के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से पशुधन में व्रद्धि होती हे और पशुओ की बीमारिया नष्ट होती है (गोबर केवल गौ माता का ही हो)।

                           

(7) श्वेतार्क श्री गणेश-  सफेद आक मन्दार की जड़ के श्री गणेश जी बनाकर पूजन करने से भूमि लाभ भवन लाभ होता हे। 

                       

(8) शत्रुंजय-  कडूए नीम की की लकड़ी से गणेश जी बनाकर पूजन करने से शत्रुनाश होता हे और युद्ध में विजय होती हे।

                           

(9) हरिद्रा गणेश-  हल्दी की जड़ से या आटे में हल्दी मिलाकर श्री गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विवाह में आने वाली हर बाधा नष्ठ होती हे और स्तम्भन होता हे।


(10) सन्तान गणेश-  मक्खन के श्री गणेश जी बनाकर पूजन से सन्तान प्राप्ति के योग निर्मित होते हैं।


(11) धान्यगणेश- सप्तधान्य को पीसकर उनके श्रीगणेश जी बनाकर आराधना करने से धान्य व्रद्धि होती हे अन्नपूर्णा माँ प्रसन्न होती हैं।    


(12) महागणेश-  लाल चन्दन की लकड़ी से दशभुजा वाले श्री गणेश जी प्रतिमा निर्माण कर के पूजन से राज राजेश्वरी श्री आद्याकालीका की शरणागति प्राप्त होती हैं।

रविवार, 13 अगस्त 2023

१) जन्म कुंडली के केन्द्र भावों में यदि कोई ग्रह न हो (केंद्र भाव खाली हों) तो उसका फलित कैसे किया जाता है? २) जन्म कुंडली के केन्द्र भावों में यदि पाप ग्रह ही हों या सिर्फ़ पाप ग्रहों का ही प्रभाव दृष्टिगत हो तो उसका फलित कैसे किया जाता है?

केंद्र के स्वामी अपने स्वभाव को भूल जाते हैं और जैसे स्वभाव वाले ग्रह से संबंध हो वैसा फल देते हैं। त्रिकोण में हो यह त्रिकोण के स्वामी के साथ संबंध होने पर फल विशेष शुभ हो जाता है। यदि किसी दूसरे पाप स्थान 3,6,8,12 में हो या उनके स्वामी के साथ हो जैसे 3,6,8,12 के स्वामी के साथ संबंध हो जाए तो सामान्य रूप से फल देता है। 

शुभ ग्रह गुरु शुक्र केंद्रेश हैं, तो बुरे हैं। परंतु बुध केंद्रेश हो तो शुक्र की अपेक्षा कम बुराई करेगा। चंद्र केंद्रेश हो तो बुध से कम बुराई करेगा अर्थात चंद्र बुध शुक्र गुरु उत्तरोत्तर बुराई में बुरे हैं। 

स्वभाविक पाप ग्रह यदि केंद्रेश होकर त्रिषडाय (3-6-11) के भी स्वामी हो जाएं तो पाप कारक हो जाते हैं। 

पाप ग्रहों के केंद्रेश होने में इतना शुभत्व आ जाता है कि वह अपने पाप फल को नहीं देता यदि वह उस समय त्रिकोणेश भी हो जावे तो उसे शुभ फल देने का बल आ जाता है। 

जन्म कुंडली के केंद्र भावों में यदि पाप ग्रह ही हो या सिर्फ पाप ग्रहों का प्रभाव दृष्टिगत हो तो इसका फलित कैसे किया जाता है

1,4,7,10 स्थान क्रम से उत्तरोत्तर बली है। जैसे:- पाप ग्रह 1,4 भाव का स्वामी हो जाए तो लग्न की अपेक्षा चतुर्थेश शुभ फल देने में अधिक बली होगा। 

शनि की राशि 10,11 लग्न में हो और शनी उसे देख रहा हो तो लग्न बली हो जाता है। और शनी अपनी दशा अंतर्दशा में शुभ फल देता है। 

केंद्र में पाप ग्रह अशुभ फल देते हैं और आयु कम करते हैं। 


 कुंडली के केंद्र भावों में यदि कोई ग्रह न हो (केन्द्र भाव खाली हों ) तो उसका फलित निम्नानुसार भी किया जाता है :---

1केन्द्र भाव लग्न, चतुर्थ, सप्तम तथा दशम भाव होते हैं। प्रथम भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव तथा दशम भाव होते हैं। इन चारों भावों मे जो--जो राशि है,  उस राशि का स्वामी ग्रह जिन जिन भावों में स्थित होते हैं उनके अनुसार केन्द्र के भावों का फलित किया जाता है। यदि केन्द्र में स्थित राशि का स्वामी ग्रह यदि त्रिकोण भाव में स्थित हो तो शुभ फल प्राप्त होता  है। यदि केन्द्र में स्थित राशि का स्वामी ग्रह षष्ट, अष्ठम या द्वादश भाव मे स्थित हो तो शुभ फल मे कमी आयेगी । 

*केन्द्र के भावों मे लग्न, चतुर्थ, सप्तम दशम भाव पर जिस ग्रह की दृष्टि होती है के अनुसार भी केन्द्र के भाव का फलित किया जाता है। 

2-जन्म कुंडली के केन्द्र भावो मे यदि पाप ग्रह हो तो वह अपना पाप फल स्थगित कर देंगे। जैसे तुला लग्न की कुंडली में मंगल सप्तमेश है और द्वितीयेश भी है। द्वितीयेश होकर सम है और सप्तमेश होकर अपना अशुभ फल स्थगित कर देगा। इसलिए तुला लग्न में मंगल मारक का फल नहीं देता है। 

यदि केन्द्र में स्थित भावों पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो पाप ग्रह की स्थिति के अनुसार फलित बताना चाहिए ।केन्द्र मे स्थित भाव मे स्थित राशि और दृष्टि डालने वाले  पाप ग्रह किस भाव का स्वामी ग्रह है तथा लग्नेश का मित्र है या शत्रु है या सम भाव रखता है।  जिस भाव पर दृष्टि डाल रहा है उस भाव मे स्थित राशि से दृष्टि डालने वाले पाप ग्रह के मध्य मित्रता है या शत्रुताहै या सम भाव रखता है के अनुसार फलप्राप्त होगा।

शनिवार, 6 मई 2023

श्री श्याम ज्योतिष संस्थान : एक सूचना

 1 .आप सभी शुभचिंतको को सूचित किया जाता है की कल दिनांक 07/05/2023से इस ज्योतिष ब्लॉग हर रविवार को श्याम 4:00 pm से 5:00 pmके बीच सक्रिय रहूँगा | उस समय आप ब्लॉग  पर टिप्पणी के जरिये मुझसे संपर्क साध सकते है |मेरे द्वारा सभी को जवाब देने का प्रयास रहेगा |

2. रविवार के दिन ही निशुल्क परामर्श के लिए प्रातः 8:00 से 9:00 बजे के बीच ही whatsapp नंबर 9782316887 पर मेसेज करना होगा |आपके मेसेज में नाम ,जन्म दिनांक ,जन्म समय और जन्म स्थान बताना होगा और साथ में कोई कुंडली हो तो वो भी सेंड कर सकते है | अपना एक प्रश्न भी लिखना होगा जिसका आप जवाब चाहते है |याद रहे सिर्फ एक प्रश्न |अतिरिक्त प्रश्न के लिए आपको फीस देनी होगी |

3.प्रथम दो मेसेज करने वाले संपर्ककर्ताओ को परामर्श निशुल्क दिया जाएगा |बाकि संपर्ककर्ताओं को न्यूनतम फीस के द्वारा परामर्श दिया जाएगा |परामर्श शुल्क मुख्य फीस से 50% कम 251रुपये होगा |

4. जो भी व्यक्ति रविवार को संपर्क करता है  प्रातः 8:00 से 9:00 बजे के बीच में उसे ही यह लाभ दिया जाएगा |

5 .मेरे द्वारा परामर्श देने का समय श्याम 4.00से 5.00 बजे तक ही होगा |इस दौरान यदि सभी के जवाब नहीं दे पाया तो अगले दिन उनसे संपर्क कर के ही जरुर जवाब दिया जाएगा |

6 परामर्श का निर्धारित शुल्क पहले ही जमा करना होगा |शुल्क के बारे में जानकारी ब्लॉग पर पूर्व में ही मेरे द्वारा बताया जा चुका है | 

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021

श्री श्याम ज्योतिष संस्थान : ज्योतिषीय उपाय के लिए सदा आपके साथ

 जीवन में उतार चढाव आते रहते है | किसी भी समस्या का ज्योतिषीय कारण और उपाय के लिए मुझे आप 9782316887 पर व्हाट्स अप करे या मुझे कॉल करें | मेरी फीस 501 रुपये है | पहले पूरी फीस मुझे किसी भी माध्यम से phone pay , google pay या  pay tm करे ,फीस जमा की रशीद भी डाले | थोडा समय दे निश्चित आपकी समस्या का समाधान किया जाएगा |

                                                                     ज्योतिषी रवि व्यास |

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